उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव कभी यू.पी की व्यवस्था को लेकर तो कभी अपने पिता मुलायम सिंह यादव की
वज़ह से सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन राजनीतिक मसलों से इतर भी अखिलेश यादव की
अपनी एक पहचान है। जो उनकी पत्नी डिंपल यादव से है, जिनसे वह बेहद प्यार करते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले युवा सीएम की लव लाइफ काफी दिलचस्प रही
है। अभूतपूर्व
सुंदरता की मालकिन लेकिन बेहद ही सौम्य और शांत डिंपल यादव और उनके पति अखिलेश
यादव की प्रेम-कहानी किसी भी हिंदी फिल्म से कम नहीं। डिंपल ठहरी एक आर्मी ऑफिसर
की लविंग बेटी तो वहीं अखिलेश मियां देश की राजनीति में बड़ा स्थान रखने वाले सपा
सु्प्रीमो मुलायम सिंह यादव के पुत्र। एक का परिवार सियासी दांवपेच से कोसो दूर तो
वहीं एक के परिवार में सियासत के दो-चार के अलावा कुछ नहीं। लेकिन कहते हैं ना
जोड़ियां तो आसमानों में बनती हैं और इसी कारण डिंपल और अखिलेश भी मिले, दोस्त बने, दोस्ती प्यार में बदली और धीरे-धीरे दोनों
एक-दूसरे के हमसाये और हमसफर बन गये लेकिन दोनों के लिए एक दूसरे को पाना इतना
आसान नहीं था।
प्यार और राज्य की दीवार
दोनों
एक बिल्कुल अलग-अलग पृष्ठभूमि के थे। अखिलेश-डिंपव की पहली मुलाकात लखनऊ कैंट
इलाके में कॉमन फ्रैंड के घर पर एक पार्टी के दौरान हुई थी। उस समय अखिलेश ने हाल
ही में मैसूर के जयचामराजेंद्र कॉलेज से सिविल इनवायरनमेंट इंजीनयरिंग का पाठ्यक्रम
पूरा किया था, जबकि
डिम्पल लखनऊ के आर्मी स्कूल में स्कूल की पढ़ाई पूरी कर रही थी। शुरू में वे अच्छे
दोस्त बने फिर एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए। यह
दोनों लड़ाकू जातियों से ताल्लुक रखते थे और राजनीतिक व ऐतिहासिक रूप से एक दूसरे
के विरोधी थे। अखिलेश क्रमशः यादव और डिंपल राजपूत जाति से ताल्लुक रखती थीं। उससे
भी बुरी बात यह थी की लड़की के गृहराज्य में लोग लड़के के पिता से घोर नफरत करते थे
जो बाद में उत्तराखंड नाम का अलग प्रांत बन गया। उसके राज्य के लोग अखिलेश के पिता
के उस आदेश को नहीं भूल पाए थे,
जो उन्होंने मुजफ्फरनगर के पास रामपुर तिराह में
निर्दोष पहाडियों पर हमले करने के लिए दिए थे। यह 1 अक्टूबर 1994 की
बात थी। नतीजतन, अखिलेश
के पिता मुलायम सिंह यादव को एक तरह से उस सीमावर्ती पहाड़ी राज्य में प्रवेश करने
से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
लेकिन
इन सभी बातों से पूरी तरह बेखबर यह जोड़ा नियमित तौर पर मिलता-जुलता रहा। कभी लखनऊ
के मोहम्मद बाग क्लब में तो कभी कैंट इलाके के सूर्या क्लब में। वे अक्सर अपने
दोस्तों से मिलने के बहाने आपस में मिलते।
परिवार
को प्यार का पता चला
उस
समय अखिलेश यादव उम्र के तीसरे दशक में प्रवेश कर चुके थे, और
डिम्पल की उम्र 17 साल
थी। जब
वे एक दूसरे से मिलजुल रहे थे उस समय उत्तर प्रदेश के पहाड़ जल रहे थे। 1994 में
पुलिस फायरिंग के बाद अलग राज्य की मांग जोर पकड़ चुकी थी। गढवाल और कुमायु के
पहाड़ों में धरने-प्रदर्शनों की झड़ी लग गई थी और हरेक दिन अखिलेश के पिता के खिलाफ
नारे लगते थे।
अखिलेश
जो उस समय पर्यावरण इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, उन्होंने उत्तराखंडियों और अपने
पिता के बीच तनाव के बारे में सुना था लेकिन वे इसके राजनीतिक नतीजों को नहीं समझ
पा रहे थे। 1996 में
अखिलेश ने इनवॉयरनमेंटल इंजीनियरिंग में एमएस करने का फैसला किया और सिड़नी
(ऑस्ट्रेलिया) चले गए। हालांकि वे डिम्पल को पत्र लिखते रहे। कभी-कभी पत्र के साथ
एक ग्रीटिंग कार्ड भी आ जाता। 1999 में अखिलेश ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई पूरी करके आए।
यह वह दौर था जब अखिलेश डिंपल के साथ एक धागे में बंधने के लिए पूरी तरह से तैयार
थे लेकिन घरवालों से बात करने में उन्हें थोड़ी हिचक थी
क्योंकि
वह जानते थे कि उनके डिम्पल से सबंध में परिवार में कई तरह के विवाद है और उससे
निपटना जरूरी है। लेकिन अखिलेश के लिए शादी की बात जल्द करना बहुत जरूरी था
क्योंकि उनकी दादी की तबेयत खराब होने के कारण मुलायम सिंह ने उनपर शादी का दबाव
डालना शुरू कर दिया था।
ऐसे
में अखिलेश ने अपने परिवार को डिम्पल के साथ अपने संबंधों के बारे में बताने का
फैसला कर लिया। उन्होंने सबसे पहले अपनी दादी मां मुरती देवी को इस विषय में बताया।
उनकी दादी ने बचपन से ही उनका पालन-पोषण किया था और वह उन्हें बहुत प्यार करती थी।
वह हर हाल में अखिलेश को खुश देखना चाहती थी इसलिए दादी ने अखिलेश को शादी के लिए
अपना स्वीकृति दे दी।
मुलायम
का डर
उस
समय तक मुलायम को भी अपने बेटे के डिम्पल से सबंध के बारे में पता चल गया था।
हालांकि मुलायम सिंह को डिम्पल से कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन उन्हें पहाड़ के
आंदोलनकारियों से भय लग रहा था,
जिन्होंने एक अलग राज्य की मांग के लिए आंदोलन तेज
कर दिया था और यादव नेता को किसी कीमत पर माफ करने की मानसिकता में नहीं थे।
उन्हें हाल में उनके भतीजे के बेटों तेजवीर ओर सिल्लू को मिली धमकी से भी चिंता थी
जिन्हें हवाईजहाज से उठाकर स्कूल से घर लाया गया था। उन्हें पहाड़ के आंदोलनकारियों
ने हमले की धमकी दी थी। बच्चों के दादा और मुलायम सिंह के चचेरे भाई प्रो.
रामगोपाल यादव उन्हें सहारनपुर के सरसनवा हवाईपट्टी से वापस सुरक्षित जगहों पर ले
गए थे।
उस
समय मुलायम केंद्र में रक्षामंत्री थे। उत्तर प्रदेश और बिहार में प्रमुख यादव
घराने अखिलेश की शादी उनके परिवार में करना के लिए आग्रह कर रहे थे लेकिन डिम्पल
को लेकर अखिलेश प्रतिबद्ध थे और एक बार दादी की स्वीकृति मिल जाने के बाद उन्होंने
सभी को बता दिया कि वे सिर्फ डिम्पल से ही शादी करेंगे।
तत्कालीन
सपा महासचिव अमर सिंह अखिलेश की शादी बिहार के एक जाने-माने राजनीतिक परिवार में
करवाना चाहते थे लेकिन अखिलेश,
डिम्पल के प्यार में इस कदर खोए हुए थे कि कोई अन्य
लड़की उन्हें जीवनसाथी के तौर पर स्वीकार नहीं थी। उनके परिवार ने भी उनसे कुछ दिन
रुकने के लिए कहा क्योंकि डिम्पल की बड़ी बहन की अभी शादी नहीं हुई थी और उनको ऐसा
लग रहा था कि उनकी शादी डिम्पल की शादी से पहले जो जाएगी। उसी समय मीडिया में ये
भी खबर तैर रही थी की एक राजनीतिक परिवार का लखनऊ आगमन हो रहा हैं। चूंकि अखिलेश
ने अपने प्रेम को रहस्य बनाकर रखा था,
स्थानीय अखबार इस खबर से भरे हुए थे कि बिहार और
यूपी के दो राजनीतिक परिवारों का मिलन होने वाला है और दोनों रिश्तेदार बनने वाले
हैं। हालांकि बाद में पता चला कि ये सारी बातें अफवाह थीं और अखिलेश इन अफवाहों से
बिल्कुल बेखबर थे।
परिवार
ने मुलायम को मनाया
मुलायम
अखिलेश के जिद्दी स्वभाव को जानते थे। उन्होंने पहाड़ में अपने कुछ दोस्तों से बात
की और सूर्यकांत धसमाना से राय ली जो डिम्पल के परिवार को नजदीकी से जानते थे।
डिम्पल का परिवार किलबउखाल गांव का है जबकि धसमाना का गांव वहां से नजदीक ही है जो
पौड़ी-गढ़वाल जिले में पड़ता है। घसमाना इस बारे में कहते हैं कि ‘शुरू
में मुलायम इस बात से चिंतित थे कि पहाड़ के लोग उनसे नफरत करते है। उन्होंने अपने
भाई शिवपाल से अखिलेश को राजी करने को कहा कि वो शादी न करे। अखिलेश ने शिवपाल के
साथ बरसों गुजारे हैं। लेकिन हम लोग चाहते थे कि यह संबंध हो।’
बिहार
के वरिष्ठ समाजवादी नेता कपलि देव सिंह ऐसे नेता थे जिनसे मुलायम को डर भी लगाता
था और वे उनकी इज्जत भी करते थे। उन्होंने मुलायम से कहा था कि, ‘ अगर
उन्होंने अखिलेश की मर्जी के बिना उसकी शादी कहीं और कर दी तो वे चार परिवारों को
दुखी कर देंगे। जहां अखिलेश की शादी होगी वह लड़की और तुम्हारा घर और जहां डिम्पल की शादी
होगी वह लड़का और डिम्पल का घर। आपके एक गलत फैसले से सभी लोग दुखी हो जाएंगे और
उसे आजीवन महसूस करेंगे।’
उत्तराखंड
के वरिष्ठ सपा नेता विनोद बर्थवाल ने भी मुलायम को यही सलाह दी लेकिन जरा दूसरी
तरीके से। उन्होंने कहां, ‘देवभूमि
की हमारी लड़कियां बहुत ही सुसंस्कृत और पारंपरिक होती है। वे पारिवारिक मूल्यों की
इज्जत करती हैं और उसे साथ रखती है। वह आपके बेटे और परिवार के लिए बहुत ही शुभ
होगी।’ जिसके
बाद मुलायम इस विवाह के लिए राजी हो गए।
अखिलेश वेडस डिंपल
डिम्पल
के घरवालों से बात की गई और वह खुशी-खुशी राजी हो गए। अखिलेश के मुताबिक उस समय के
हालात के मद्देनजर से बहुत आसान काम नहीं था। डिम्पल के माता-पिता के बारे में
उनका कहना था, ‘वे
लोग आसानी से मान गए, ये
अच्छा हुआ।’
24 नवम्बर
1999 को
अखिलेश की डिम्पल से उनके पैतृत गांव सैफई में शादी हो गई। दिल्ली और लखनऊ में
प्रीतिभोज का आयोजन हुआ। अमर सिंह इन सब आयोजनों में मुख्य भूमिका में देखे गए। और
देश की तमाम बड़ी राजनीतिक और कॉरपोरेट हस्तियां इन प्रीतिभोज में शामिल हुई, जिनमें
उद्योग और मनोरंजन जगत की मशहूर हस्तियां शामिल थीं।
एक
दूजे से बिल्कुल अलग
डिंपल और अखिलेश एक
दूसरे से पूरी तरह से अलग हैं, इसके बाद भी वे सफल
दंपति हैं। अखिलेश की रुचि राजनीति और स्पोर्टस हैं। वहीं डिंपल को घुड़सवारी और
पेटिंग का शौक है। अखिलेश अपनी निजी जिंदगी में डिंपल का बहुत सम्मान करते हैं यही
वजह है कि कई बार उनके मुंह से ये सुना गया कि शादी करके मेरी किस्मत खुल गई। 17 साल की इस शादी में
इनके तीन प्यारे-प्यारे बच्चे अदिति, टीना और अर्जुन हैं।
डिंपल अखिलेश को प्यार से अखिलेश दादा के नाम से पुकारती हैं। अपने बिजी शेड्यूल
से समय निकालकर ये दोनों घंटों साथ में समय बिताते हैं। परिवार को जानने वाले
बताते हैं कि अखिलेश देर रात को भी डिंपल के साथ समय बिताने के लिए कॉफी शॉप जाते
हैं।


