मंगलवार, 10 फ़रवरी 2015

झाङू का दम

ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।

केजरी ना बक्शे,
अबकी किसी को,
चाहे वो हो शाह,
या राहुल हो।

ना चला जादू,
ना माँ का प्यार,
अबकी चल गया,
मफ्लरमैन का वार।

केजरी पङ गए,
ओबामा तक पे भारी,
अब तो रोये,
भाजपा सारी।


ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।


ना आया काम ,
दीदी का भी नाम,
विश्वास की कविता ने ही,
कर दिया काम।

केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
मोदी तो है गायब,
दिल्ली विधान सभा से।

ना दीदी बोले,
ना माखन कुछ भी,
अब खांसी बोले,
बस केजरी की।

केजरी की झाडू,
बन गई वैकयूम,
सूख गया फूल,
उड गई धूल।

ना सीना चोडा,
ना आवाज भारी,
फिर भी देखो चाहे,
दिल्ली सारी।

केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
विपक्ष है गायब,
पूरी सत्ता से 


ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।


बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

नन्हा सा दर्द….

माँ तू क्यों रोती है,
मैं आज भी तेरे साथ हूँ।
मरा नहीं मैं,
शहीद हुआ हूँ।

शायद शहादत मेरी ,
इस मुल्क को अमन की कीमत समझा दे।
या फिर,
र्दद मेरा इन आतंकियों का भी रूला दे।

माँ अपनी मुस्कान तू खो न देना कभी,
रहेगी यही आरजू मेरी।
तेरा रिश्ता मुझसे टूटेगा न कभी,
करूँगा खुदा से दुआ मै यही।

बन्दू्क से डरा नही था मैं कभी,
तेरी दुआ थी मुझे से जुडी।
पर आंखो से अश्क गिरा एक तभी,
तुझे एक बार देखने की हसरत थी मेरी।

बस एक बार बंदूक से कहा मैने,
मुझे एक बार तुझसे मिला दे।
अजीब सी मुस्कान थी उसके चहरे पे,
जैसे जीत लिया हो मुझसे जहां उसने।

मुझे मार कर शायद उसे,
फतेह करना था पूरा जहां।
पर बदले में मिला क्या उसे ,
सिर्फ उसका कहर।

हिसाब मागूंगा खुदा से माँ,
मै तेरे नौ महिनों के दर्द का।
तू आँसू ना बहाना,
कभी गम ना मनाना।

तेरा बेटा मरा नही,
शहीद हुआ है।