ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।
केजरी ना बक्शे,
अबकी किसी को,
चाहे वो हो शाह,
या राहुल हो।
ना चला जादू,
ना माँ का प्यार,
अबकी चल गया,
मफ्लरमैन का वार।
केजरी पङ गए,
ओबामा तक पे भारी,
अब तो रोये,
भाजपा सारी।
ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।
ना आया काम ,
दीदी का भी नाम,
विश्वास की कविता ने ही,
कर दिया काम।
केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
मोदी तो है गायब,
दिल्ली विधान सभा से।
ना दीदी बोले,
ना माखन कुछ भी,
अब खांसी बोले,
बस केजरी की।
केजरी की झाडू,
बन गई वैकयूम,
सूख गया फूल,
उड गई धूल।
ना सीना चोडा,
ना आवाज भारी,
फिर भी देखो चाहे,
दिल्ली सारी।
केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
विपक्ष है गायब,
पूरी सत्ता से
ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।
केजरी ना बक्शे,
अबकी किसी को,
चाहे वो हो शाह,
या राहुल हो।
ना चला जादू,
ना माँ का प्यार,
अबकी चल गया,
मफ्लरमैन का वार।
केजरी पङ गए,
ओबामा तक पे भारी,
अब तो रोये,
भाजपा सारी।
ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।
ना आया काम ,
दीदी का भी नाम,
विश्वास की कविता ने ही,
कर दिया काम।
केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
मोदी तो है गायब,
दिल्ली विधान सभा से।
ना दीदी बोले,
ना माखन कुछ भी,
अब खांसी बोले,
बस केजरी की।
केजरी की झाडू,
बन गई वैकयूम,
सूख गया फूल,
उड गई धूल।
ना सीना चोडा,
ना आवाज भारी,
फिर भी देखो चाहे,
दिल्ली सारी।
केजरी है छाये,
अब हर जगह पे,
विपक्ष है गायब,
पूरी सत्ता से
ना चला हाथ,
ना खिला फूल,
अबकी चल गई,
झाङू भरपूर।