बुधवार, 4 फ़रवरी 2015

नन्हा सा दर्द….

माँ तू क्यों रोती है,
मैं आज भी तेरे साथ हूँ।
मरा नहीं मैं,
शहीद हुआ हूँ।

शायद शहादत मेरी ,
इस मुल्क को अमन की कीमत समझा दे।
या फिर,
र्दद मेरा इन आतंकियों का भी रूला दे।

माँ अपनी मुस्कान तू खो न देना कभी,
रहेगी यही आरजू मेरी।
तेरा रिश्ता मुझसे टूटेगा न कभी,
करूँगा खुदा से दुआ मै यही।

बन्दू्क से डरा नही था मैं कभी,
तेरी दुआ थी मुझे से जुडी।
पर आंखो से अश्क गिरा एक तभी,
तुझे एक बार देखने की हसरत थी मेरी।

बस एक बार बंदूक से कहा मैने,
मुझे एक बार तुझसे मिला दे।
अजीब सी मुस्कान थी उसके चहरे पे,
जैसे जीत लिया हो मुझसे जहां उसने।

मुझे मार कर शायद उसे,
फतेह करना था पूरा जहां।
पर बदले में मिला क्या उसे ,
सिर्फ उसका कहर।

हिसाब मागूंगा खुदा से माँ,
मै तेरे नौ महिनों के दर्द का।
तू आँसू ना बहाना,
कभी गम ना मनाना।

तेरा बेटा मरा नही,
शहीद हुआ है।


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